कोलकाता तिहरा हत्याकांड: पुलिस का दावा – पारिवारिक साजिश, बाहरी कोई नहीं

कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने मंगलवार को बताया कि यह हत्याकांड पूरी तरह से पारिवारिक मामला है, जिसमें दोनों भाई ही दोषी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जघन्य अपराध में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था। हत्या का कारण उनके व्यवसाय से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने कहा कि हत्याओं का मकसद व्यवसाय से जुड़ा हुआ था।

डे परिवार के तीन सदस्य 19 फरवरी को टांगरा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे, जबकि परिवार के ही तीन अन्य सदस्य—दो भाई और एक का बेटा—उसी दिन ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास पर मेट्रो रेल के खंभे से कार टकराने के बाद घायल हो गए थे।

यह परिवार कोलकाता के पूर्वी हिस्से में स्थित एक मकान में रहता था, जहां दो भाई—प्रणय और प्रसून डे—अपनी पत्नियों सुदेशना और रोमी के साथ रहते थे। प्रणय का बेटा और प्रसून की बेटी भी घर के अन्य सदस्यों में शामिल थे।

पुलिस कमिश्नर वर्मा ने कहा, “हमें पूरा यकीन है कि इस अपराध के पीछे दोनों भाई हैं, और इसमें कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं है। उन्होंने हमें पूरी घटना के बारे में बताया, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की राय जरूरी है। फिलहाल, हम यह स्पष्ट नहीं कर सकते कि उनकी विशिष्ट भूमिकाएँ क्या थीं।”

अधिकारियों के मुताबिक, दोनों भाइयों ने शुरुआत में पुलिस को बताया था कि परिवार के सभी सदस्यों ने आत्महत्या की योजना बनाई थी। उनके दावे के अनुसार, सभी ने नींद की गोलियों के साथ दलिया खाया था।

घर में हुई मौतों का खुलासा पुलिस को कार दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति से हुआ। जांच में सामने आया कि चमड़े के व्यवसाय से जुड़े इस परिवार पर गंभीर आर्थिक तंगी का दबाव था।

पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने कहा, “हत्या का मकसद संभवतः उनके व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने यह भी पुष्टि की कि एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज करा रहे दोनों भाइयों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जब एक निजी अस्पताल में भर्ती किशोर लड़के के भविष्य को लेकर सवाल किया गया, तो वर्मा ने कहा कि इस मामले में कानूनी राय ली जाएगी।

उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चे की कस्टडी लेने के लिए कोई योग्य रिश्तेदार आगे आए।

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