कल्पना चावला: भारत की पहली बेटी, जिसने अंतरिक्ष में रचा इतिहास

नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 286 दिनों के विस्तारित मिशन के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। इस ऐतिहासिक पल में, दुनिया को एक और भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री की याद आ रही है – कल्पना चावला। अंतरिक्ष अन्वेषण में उनकी अमिट छाप और प्रेरक यात्रा को इस अवसर पर फिर से याद किया जा रहा है।

अंतरिक्ष की ओर पहला कदम

17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना चावला ने बचपन से ही अंतरिक्ष और विमानों में गहरी रुचि दिखाई।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक – पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज
टेक्सास यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री (1984)
कोलोराडो यूनिवर्सिटी से पीएचडी (1988)

उनकी मेहनत और जुनून ने उन्हें 1994 में नासा तक पहुंचाया। मात्र तीन साल बाद, 1997 में, वह भारतीय मूल की पहली महिला बनीं, जिन्होंने मिशन STS-87 के दौरान स्पेस शटल कोलंबिया में उड़ान भरी।

कल्पना चावला की ऐतिहासिक उपलब्धियां

🔹 1997: पहली अंतरिक्ष उड़ान (STS-87) – मिशन विशेषज्ञ और रोबोटिक आर्म ऑपरेटर
🔹 2003: दूसरी अंतरिक्ष उड़ान (STS-107) – वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए
🔹 NASA का सर्वोच्च सम्मान: कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर

भारत के प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने पहली उड़ान के दौरान कल्पना से कहा,
“भारत को आप पर गर्व है। आपने महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक कार्य किया है।”
कल्पना ने उत्तर दिया,
“एक अंधेरे आकाश का गुंबद और चारों ओर तारे… बिल्कुल किसी कहानी की तरह।”

2003 की त्रासदी: अंतरिक्ष की वीरांगना को दुनिया ने खो दिया

1 फरवरी 2003, जब कल्पना चावला अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के बाद पृथ्वी पर लौट रही थीं, स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा पृथ्वी से 16 मिनट पहले हुआ और सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली गई।

कल्पना चावला की अमर विरासत

🚀 नासा ने एक अंतरिक्ष यान का नाम “SS कल्पना चावला” रखा।
🚀 उनकी जयंती (17 मार्च) को भारत में ‘स्पेस डे’ के रूप में मनाया जाता है।
🚀 भारत में कई शिक्षण संस्थानों और सड़कों का नाम उनके सम्मान में रखा गया।
🚀 STEM में रुचि रखने वाली लड़कियों के लिए वे आज भी एक प्रेरणास्त्रोत हैं।

आज भी ज़िंदा है सपना

“भारत की बेटी ने सितारों से परे सपने देखने का साहस किया।” – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
“उनकी विरासत महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनी रहेगी।” – मल्लिकार्जुन खड़गे
“उनका साहस और समर्पण युवा पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।” – केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

जब दुनिया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न मना रही है, तब हमें यह याद आता है कि कल्पना चावला की विरासत हर उस अंतरिक्ष यात्री के भीतर जीवित है, जो सितारों तक पहुंचने का सपना देखता है।

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